Startups kya hote hai है ,और कैसे काम करते है

हैलो दोस्तों मेरे इस नए ब्लॉग में आपका स्वागत है ,दोस्तों आप जरूर न्यूज़ ,में अखबार में या किसी न किसी से  स्टार्टअप के बारे में जरूर सुना होगा यहाँ तक की क्या आप जानते है हमारे देश में भी बहुत से स्टार्टअप है ,जो दिन प्रतिदिन तरक्की कर रहे है ,जिन्हे हमारे सरकार की समय समय पैर मदद करती रहती है ,तो आज हम बात करेंगे की आखिर यह स्टार्ट उप क्या होते है ,क्या होते है इसके फायदे और क्या नुक्सान ,क्यों यह देश के लिए जरुरी है ,आइये विस्तार में जानते है ,

स्टार्टअप क्या है?

कुछ सालो से स्टार्टअप्स का चलन खासकर भारत में खूब चल रहा है ,यह हमारी बढ़ती हुई इकॉनमी का प्रतीक है ,जिसमे नए नए लोग बिज़नेस में उतरकर आ रहे है अपनी प्रतिभावो को दिखा रहे  है ,

इसलिए हम जानते है ,आइएदोस्तों स्टार्टअप उन छोटी कंपनियों को कहा जाता है ,जो किसी मकसद से बिज़नेस में उतरती है ,जिनका उद्देशय किसी भी तरह से लोगो की मदद करना होता है अक्सर ऐसा नहीं होता बहुत से स्टार्टअप्स scam और धोखा भी होता है ,जिनका उद्देशय सही होता है ,वह अपने बिज़नेस की मदद से आम लोगो की जिंदगी में value add करते है ,

उनकी जिंदगी आसान बनाते है जैसे की Uber जिसने टैक्सी को बस एक मोबाइल के क्लिक जितना आसान बना दिया है ,जब यह स्टार्टअप मार्किट में आते है तो यह एक विज़न लेकर मार्किट में उतरते है ,इनका सबसे पहला मकसद होता है की फंडिंग raise करना ,

क्योँकि हर चीज़ को बनाने में लागत आती है और शुरुवात में सबके पास पैसो की तंगी होती है ,इसलिए यह कम्पनी बड़े बड़े एंजेल इन्वेस्टर्स को अपने आईडिया दिखाती है जिससे उन्हें फंडिंग मिलने में आसानी होती है ,अक्सर देखा गया है की बड़े बड़े इन्वेस्टर फंडिंग देने में उत्साहित होते है ,शायद इसका बड़ा कारण यह है की वह रिटर्न्स के साथ साथ ऐसे बिज़नेस को भी बढ़ावा देते है

Startup कैसे फंडिंग raise करते है –

स्टार्टअप फंडिंग लेने के लिए अलग अलग तरीको का इस्तेमाल करते है ,पहले वह अपनी सर्विसेज या जो भी उनका idea या विज़न होता है ,उसे बड़े बड़े इन्वेस्टर्स को दिखाते है ,जिन्हे हम Angel  Investor भी बोलते है ,यह वह बड़े बड़े इन्वेस्टर्स होते है जो ऐसे ही किसी स्टार्टअप की तालाश में होते है जो भविष्य में उनको पैसा बना सके ,

तो अगर किसी इनवेस्टर को उनका आईडिया पसंद आ जाता है ,तो उसमे वो कई चरणों में फंडिंग करते है जो की फिक्स procedure से गुजरती है ,दूसरा तरीका आईपीओ लेकर आना ,

आईपीओ लाने से स्टार्टअप जनता से पैसे लेते है और उसके बदले कंपनी के कुछ शेयर्स को पब्लिक कर दिया जाता है और आम जनता के लिए कंपनी के शेयर को पब्लिक कर दिया जाता है ,जनता से पूंजी जुटाने के लिए स्टार्टअप को शेयर मार्किट में लिस्ट होना पड़ता  है ,और यह सुनिशित करना पड़ता है की उनके आईपीओ का सब्सक्रिप्शन कम से कम 90 प्रतिशत हो वरना आईपीओ सेबी द्वारा कैंसिल कर दिया जाता है ,

आईपीओ लाने के लिए कंपनी को मर्चेंट बैंक की सहायता लेनी पड़ती है ,लेकिन यहाँ पर ध्यान देनी वाली बात यह है की यदि कंपनी का का सब्सक्रिप्शन 90 प्रतिशत से कम होता है तो वो आईपीओ कैंसिल हो जाता है ,इसलिए वही कंपनी आईपीओ लाती है जिनको जनता पहले से जानती है और ज्यादार स्टार्टअप्स इसलिए स्टॉक मार्किट में नहीं आते |

StartUp कंपनी के फायदे और नुकसान

  • स्टार्टअप कंपनी को सबसे पहले इन्वेस्टर्स को ढूँढना पड़ता है जो की बेहद मुश्किल काम है ,क्यूंकि इन्वेस्टर का विश्वास जितना पड़ता है तभी फंडिंग मिलती है
  • अगर कंपनी को इन्वेस्टर्स से फंडिंग मिल जाती है तो स्टार्टअप्स का ज्यादतर पैसा बच जाता है क्यूंकि सारा पैसा इन्वेस्टर्स का ही लगता है यहाँ तक की कर्मचारियों की सैलरी भी वही देते है
  • अगर कोई स्टार्टअप को फंडिंग न मिले तो उसके लिए सर्वाइव करना बेहद मुश्किल हो जाता है
  • मार्किट में पिछली कोई reputation न होने के चलते इन्हे मार्किट से पैसा जुटाने में भी काफी मशक्त करनी पड़ती
  • स्टार्टअप कंपनी का सारा खर्च इन्वेस्टर्स उठाते है ,यदि भविष्य में स्टार्टअप फ़ैल हो जाये तो इससे इन्वेस्टर का लगाया हुआ पैसा उन्हें नहीं मिलता जिससे की इन्वेस्टर को नुकसान झेलना पड़ता है
  • अक्सर बहुत से स्टार्टअप्स केवल 18 महीनो में ही दिवालिया हो जाते है
  • स्टार्टअप्स में कंपनी के फाउंडर अक्सर expansion पर ध्यान देते है न की प्रॉफिट पर जिससे भविष्य में ज्यादातर स्टार्टअप दिवालिया भी हो जाते

क्या आपको अपना StartUp खोलना चाहिए ?

ये बात बिलकुल आप पर निर्भर करती है ,की आपको क्या लगता है ,आपको स्टार्टअप खोलना चाहिए की नहीं ,स्टार्टअप खोलना जितना स्टार्टिंग में फैंसी लगता है ,असल में वैसा होता नहीं और आपको बहुत काम करना पड़ता ,

आपको एक लीडर की सोच रखनी पड़ती है ,क्यूंकि आपको अपने competitior और अपने प्रोडक्ट की quality और कंपनी परफॉरमेंस पर एक साथ ध्यान देना होता है ,इसलिए मैंने कहा आपको एक लीडर की तरह सोच रखनी है ,क्यूंकि अक्सर केवल 18 महीनो में ही स्टार्टअप दिवालिया घोसित हो जाते ,बहुत कम ऐसे स्टार्टअप है ,जो आगे निरतर चल पाते है ,

इसलिए आपको यह सवाल खुद से पूछना चाहिए क्या में इस type का इंसान हूँ ,जो इतना कुछ संभाल सकता है ,इतना काम कर सकता है ,इन्वेस्टर्स की सरदर्दी ले सकता है ,अगर आपका जवाब हाँ है तो आप यह कर सकते है ,आप खुद का स्टार्टअप खोल सकते है

Conclusion

स्टार्टअप खोलने का ट्रेंड अब बढ़ता जारहा है कोई भी अब मार्किट में आता है और स्टार्टअप खोल देता ,लेकिन आगे सिर्फ वही स्टार्टअप बढ़ते ,जिनमे सचमुच जान होती है ,विदेशी कंपनियों के प्रोडक्ट भारत में कॉपी कर के आपकी ज्यादा दिन तक दूकान नहीं चल सकती ,इसलिए अगर सच में आपके आईडिया में दम है तो ही आपका स्टार्ट उप ऊंचाई पर जायगा

आशा है आज स्टार्टअप के बारे आपने कुछ नया सीखा होगा ,उम्मीद करता हु आप अपने जीवन में खूब तररकी करे ,खूब आगे बढे ,आपका दिन मंगलमय हो ,पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद |

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